सूचना के प्रसारण में संचार नेटवर्को की भूमिका कितनी महत्वपूर्णहोती है? विस्तार से बताइये ?

सूचना के प्रसारण में संचार नेटवर्को की भूमिका कितनी महत्वपूर्णहोती है? विस्तार से बताइये ?

6. संचार नेटवर्क
सूचना के प्रसारण में संचार नेटवर्को की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है । प्रत्येक संचार नेटवर्क का एक परिभाषिक उद्देश्य होता है । भौगोलिक आधार पर ये स्थानीय, विस्तृत, क्षेत्रीय,
महानगरीय या राष्ट्रीय स्तर पर फैले हो सकते हैं । सभी प्रकार के संचार नेटवर्को की क्रियापद्धति में कुछ न कुछ समानता होती है, जैसे आँकडो का संग्रह, उनका सम्प्रेषण, संसाधनों की परस्पर सहभागिता, आदि ।
| भारतवर्ष में दूरसंचार विभाग (Department of Telecommunication) विदेश संचार निगम लिमिटेड (Videsh Sanchar Nigham Ltd.) एवं इलेक्ट्रॅनिक्स विभाग (Department of Electronics) आदि मुख्य रूप से राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार सुविधा के लिए उत्तरदायी हैं । वर्तमान समय में क्रियाशील संचार नेटवर्को का संक्षिप्त वर्णन आगे के अनुच्छेदों में किया गया है ।
(1) अरनेट (ERNET) (2) सरनेट (SIRNET) (3) निकनेट (NICNET) (4) विद्यानेट (VIDYANET) (5) इंडोनेट (INDONET) (6) द्रोण (DRONA) (7) टाइफैकलाइन (TIFACLINE)
(8) विक्रम (VIKRAM)

6.1. अरनेट (ERNET: Education and Research Network)

अरनेट, एजुकेशन एण्ड रिसर्च नेटवर्क का संक्षिप्त नाम है, जिसकी स्थापना भारत सरकार के इलेक्ट्रोनिक्स विभाग (Departments of Electronics) दारा सातवीं पंचवर्षीय योजना के अंतर्गत 1986 में की गयी । शैक्षणिक एवं शोध समुदाय के लिए स्थापित इस कंप्यूटर नेटवर्क को भारत सरकार के अलावा संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP : United Nations Development Programme) के तहत भी सहायता प्रदान की जाती है। । अरनेट ने अपने प्रारम्भिक चरण में भारत के 8 उच्च शिक्षा संस्थानों को चुना । ये संस्थान निम्नलिखित है:
1. राष्ट्रीय सॉफ्टवेयर प्रौद्योगिकी केन्द्र (NCST : National Centre for Software | Technology), मुम्बई 2. भारतीय विज्ञान संस्थान (IIS : Indian Institute of Science), बंगलोर;
3. भारतिय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT: Indian Institute of Technology),नई दिल्ली, मुम्बई कानपुर, खड़गपुर एवं चेन्नई; तथा
4. इलेक्ट्रोनिक्स विभाग, भारत सरकार (DOE : Department of Electronics), नई दिल्ली ।
अरनेट को वास्तविक रुप से भारत में इंटरनेट लाने का श्रेय प्राप्त है । इसके साथसाथ नेटवर्किग के क्षेत्र में देश की राष्ट्रीय क्षमता को चोटी तक पहुँचाने का श्रेय भी अरनेट को ही जाता है । अरनेट की उपलब्धियों को देखते हुए केन्द्रीय मंत्रिमंडल की सलाहकार समिति ने इस नेटवर्क को नये प्रारम्भ किये जाने वाले विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी नेटवर्क हेतु आदर्श बनाने का निर्णय लिया है ।।
प्रारम्भ में अरनेट से लीज्ड लाइन युक्त टी सी पी/ आई पी (TCP /IP) एवं ओ आईआई पी (OSI-IP) से जुड़ा जा सकता था । परन्तु 1995 से सूचना पथ हेतु केवल टी सी पी | आई पी (TCP/IP: Tramission Control Protocol / Internet Protocol) का उपयोग किया जा रहा है । अंतरराष्ट्रीय अभिगम हेतु नई दिल्ली, मुम्बई, बंगलोर एवं कोलकाता में गेटवे (Gateway) की स्थापना की गई है, जिसकी कुल क्षमता 664 मेगा बाइट है । वर्तमान में अरनेट पर प्रतिदिन सूचना आवागमन का भार 10 गिगाबाइट से भी अधिक हो गया है । अरनेट के विस्तृत नेटवर्क को X.25 प्रोटोकॉल द्वारा अभिगमित किया जा सकता है । X.75 प्रोटोकॉल की मदद से अन्य नेटवर्क के दवारा अरनेट को अभिगमित किया जा सकता है ।
| इस समय शोध एवं शैक्षणिक संस्थानों समेत 700 से अधिक संस्थाएँ एवं 80,000 से अधिक उपयोगकर्ता जिनमें 8,000 से अधिक वैज्ञानिक शामिल हैं, इस नेटवर्क से लाभान्वित हो रहे है । इसके साथ-साथ वर्ल्ड वाइड वेब (WWW. World Wide Web) के द्वारा 120 से अधिक देशों के संसाधनों का अभिगम भी अरनेट के माध्यम से संभव है ।।

अरनेट के उद्धेश्य

उद्देश्य:- इस नेटवर्क के निम्नलिखित उद्देश्य हैं:(1) शैक्षणिक एवं अनुसंधान संस्थानों हेतु एक राष्ट्रव्यापी कंप्यूटर नेटवर्क की स्थापना; (2) नेटवर्किग एवं संबंधित क्षेत्रों में उच्चतर शोध, अभिकल्प एवं विकास को प्रोत्साहित
करना; (3) मानव संसाधन विकास हेतु समय-समय पर शैक्षणिक व प्रशिक्षण कार्यक्रमों व आयोजन
करना; तथा (4) विभिन्न परामर्शक कार्यक्रमों का आयोजन करना;
प्रदत्त सेवाएँ:- अरनेट निम्नलिखित सेवाएँ प्रदान करता है:(क) ई-मेल सुविधा; (ख) फाइल स्थानांतरण (FileTransfer) की सुविधा; (ग) बुलेटिन बोर्ड सेवा; (घ) विशिष्ट डेटाबेस अभिगम की सुविधा;
उपल्ब्धियाँ:- अरनेट की उपलब्धियाँ निम्नलिखित है:
(1) कंप्यूटर नेटवर्किंग के क्षेत्र में सर्वप्रथम प्रयोगात्मक क्षमता का विकास अरनेट के द्वारा ही किया गया;
(2) विभिन्न स्तरों पर मानव शक्ति का विकास;
(3) विभिन्न प्रकार के मानकों (टी सी पी/आई पी, ओ एस आई-आई पी) आदि का निर्माण;
(4) नेटवर्किग के आधार एवं सेवाओं का विकास अरनेट के द्वारा किया जा रहा है;
(5) तीव्र वेग वाले नेटवर्को का निर्माण;
(6) डिजिटल पुस्तकालयों का विकास; तथा
(7) इलेक्ट्रोनिक प्रकाशनों को बढ़ावा देना ।

6.2. सरनेट (SIRNET: Scientific and Industrial Research Network)

सरनेट, साइंटिफिक एण्ड इंडस्ट्रीयल रिसर्च नेटवर्क का संक्षिप्त नाम है, जिसकी स्थापना 1990 में वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद् (CSIR) द्वारा की गई । इस नेटवर्क से संबंधित परिषद की 40 प्रयोगशालाओं को जोड़ा गया है । इसका मुख्यालय नई दिल्ली स्थित इन्सडॉक (INSDOC) में स्थित है । सरनेट परियोजना को कार्यरुप में परिणित करने का श्रेय राष्ट्रीय सॉफ्टवेयर प्रौद्योगिकी केन्द्र (NCST) को जाता है । सरनेट मुख्य रुप से अरनेट (ERNET) के चार स्तरीय संरचना (Four Layer Architecture) पर ही आधारित है । इसके साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय डेटाबेसों के अभिगम हेतु यह अरनेट पर ही निर्भर है । सरनेट के प्रथम स्तर पर एक राष्ट्रीय नोड है जो इस नेटवर्क का आधारस्तम्भ है । इसके वितीय स्तर पर नगरीय नोड हैं जो नगरों के सूचना यातायात को नियंत्रित करते हैं । इस नेटवर्क के तीसरे स्तर पर सी एस आई आर (CSIR) की विभिन्न प्रयोगशालायें है जो या तो नगरीय नोड से या सीधे राष्ट्रिय नोड से जुड़ी हुई है। सबसे अंतिम अर्थात् चौथे स्तर पर उपयोगकर्ताओं को रखा गया है । ये उपयोगकर्ता भी नगरीय नोड से या सीधे राष्ट्रीय नोड से जुड़ सकते हैं । सरनेट संचार तंत्र यू यू सी पी (UUCP) प्रोटोकॉल पर आधारित है । सरनेट के प्रबंधन हेतु, बंगलोर, चेन्नई एवं कलकत्ता में क्षेत्रीय केन्द्र स्थापित किये गये हैं ।
उद्देश्य:- सरनेट निम्नलिखित उद्देश्यों हेतु कार्यरत है:
(1) फल प्रौद्योगिकी, चर्म प्रौद्योगिकी, प्राकृतिक उत्पाद, रसायन, रेडियो भौतिकी एवं
औषधि वनस्पति से संबंधित ऑन लाइन डेटाबेस सेवाओं का प्रबंधन करना;
(2) परिषद् की सभी प्रयोगशालाओं के बीच सूचनाओं के सम्प्रेषण को तीव्र बनाना;
(3) परिषद् की विभिन्न प्रयोगशालाओं में अधिग्रहित वैज्ञानिक उपकरणों (Scientific Instruments) का एक डेटाबेस तैयार करना;
(4) बुलेटिन बोर्ड सेवा उपलब्ध कराना; तथा
(5) दूर-सम्मेलन (TeleConferencing) की सुविधा उपलब्ध कराना। | 

Updated: July 9, 2019 — 1:58 pm

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