पुणेनेट और माइलिबनेट (MYLIBNET: Mysore Library Network) मे मुख्य रूप से क्या अंतर है, इनकी उपलब्धियां भी बताइये ?

पुणेनेट और माइलिबनेट (MYLIBNET: Mysore Library Network) मे मुख्य रूप से क्या अंतर है, इनकी उपलब्धियां भी बताइये ?

पुणेनेट डेटा विनमय हेतु अंतरराष्ट्रीय मानक आई एस ओ- 2709 (ISO-2709) का प्रयोग अपने डेटाबेस के मानक के रूप में करता है ।।
भविष्य की योजनाएँ:
(1) विभिन्न मानक प्रारूपों (यथा सी. सी. एफ. (CCF), मार्क (MARC), एल सी मार्क (LCMARC) आदि) का अपने डेटाबेस हेतु प्रयोग,
 (2) सीडी-रोम (CD-ROM) डेटाबेस के प्रयोग को बढ़ावा देना;
(3) ओ सी आर (OCR: Optical Character Recognition) तकनीक को बढ़ावा देना;
(4) भारतीय भाषाओं के डेटाबेस का निर्माण; और
(5) उलीरच (UIrich) प्लस डेटाबेस का निर्माण ।

माइलिबनेट (MYLIBNET: Mysore Library Network)

माइलिबनेट, मैसूर लाइब्रेरी नेटवर्क का संक्षिप्त नाम है । निसात (NISSAT) द्वारा वित्तीय सहायता प्राप्त इस पुस्तकालय नेटवर्क ने 19 मई 1995 से कार्य करना प्रारम्भ किया इसका नेटवर्क सेवा केन्द्र केन्द्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थान (Central Food Technology Research Insitute) मैसूर के परिसर में है । वर्तमान में मैसूर शहर के करीब 166 महाविद्यलय/संस्थान इस पुस्तकालय नेटवर्क के सदस्य हैं । इसके अलावा मैसूर शहर के आसपास 34 अन्य महाविद्यालय भी इससे संबद्ध है ।।
उद्देश्य:- मैसूर लाइब्रेरी नेटवर्क अपने निम्नलिखित उद्देश्यों हेतु सदैव प्रयत्नशील है:
(1) सदस्य पुस्तकालयों के बीच संसाधनों की साझेदारी;
(2) सदस्य पुस्तकालयों को ई-मेल सुविधा उपलब्ध कराना;
(3) सदस्य पुस्तकालयों के बेहतर प्रबंधन हेतु सॉफ्टवेयर का निर्माण;
(4) औद्योगिक संस्थानों के साथ सूचना आधार तैयार करना;
(5) समय समय पर सेमिनारों, कार्यशालाओं, प्रशिक्षण कार्यक्रमों आदि का आयोजन करना;
तथा
(6) पुस्तकालयों के कंप्यूटरीकरण हेतु सहायता प्रदान करना ।

7.8. इंप्लिबनेट (INFLIBNET: Information and Library Network)

इंफ्तिबनेट, इफोर्मेशन एण्ड लाइब्रेरी नेटवर्क का संक्षिप्त नाम है । पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान के क्षेत्र में यह एक राष्ट्रीय सहकारी नेटवर्क है । इस नेटवर्क का प्रारम्भ पुणे विश्वशिद्यालय के खगोल विज्ञान एवं खगोल भौतिकी विभाग में एक परियोजना के रूप में किया गया । सन् 1991 में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने इस परियोजना को पुस्तकालय एवं सूचना नेटवर्क के रूप में विकसित करने का निश्चय किया । इस नेटवर्क का मुख्यालय गुजरात विश्वविद्यालय, अहमदाबाद में स्थापित क्यिा गया । वर्तमान में इस नेटवर्क को एक स्वायत्तशासी संस्था का दर्जा प्राप्त हो गया है ।
| इस नेटवर्क में भारत के विश्वविद्यालयों तथा अनुसंधान एवं विकास केन्द्रों के पुस्तकालयों को एक साथ कंप्यूटर के माध्यम से इस प्रकार संबद्ध किया जा रहा है जिससे सभी प्रतिभागी पुस्तकालयों के संसाधनों की सहभागिता को बढ़ावा मिल सके। अतः यह कहा जा सकता है कि यह एक बहुमुखी कार्योन्यूख एवं सेवा नेटवर्क है ।।
इंपिलबनेट कार्यक्रम हेतु प्रारम्भ में 150 विश्वविद्यालयों के पुस्तकालयों, 50 परास्नातक केन्द्रों/संस्थानों और 200 अनुसंधान एवं विकास केन्द्रों का चयन किया गया ।
नेटवर्क संचालित करने मेन विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की भूमिका:- इस नेटवर्क की स्थापना व विकास में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है । भारत में नेटवर्क की धारणा को साकार रूप प्रदान करने में यू जी सी (UCG) ने एक सफल प्रयास किया है । 22 अप्रैल 1988 को यू जी सी के तत्कालीन अध्यक्ष प्रो. यशपाल की अध्यक्षता में हुई बैठक में एक प्रभावशाली राष्ट्रीय पुस्तकालय एवं सूचना नेटवर्क स्थापित करने पर जोर दिया गया । इस कार्यक्रम में सर्वप्रथम संबद्ध विषयों की मानवशक्ति के विकास पर ध्यान केन्द्रित किया गया था । इस लक्ष्य को ध्यान में रखकर विभिन्न प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों का आयोजन किया गया । ये प्रशिक्षण पादयक्रम मुख्य जप से पुस्तकालय विज्ञान से संबंधित मानव शक्ति के कंप्यूटर शान को बढ़ावा देने हेतु आयोजित किये जाते हैं ।

नेटवर्क का रचरूप:- 

यह एक राष्ट्रीय सहकारी नेटवर्क है, जिसमें देश के सभी उच्च शिक्षा संस्थानों, राष्ट्रीय संगठनों, अनुसंधान एवं विकास यथा डी आर डी ओं (DRDO), सी एस आई आर (CSIR),आई सी एस एस आर (ICSSR) डी ओ टी (DOT), ए आई सी टी ई (AICTE), आई सी ए आर (ICAR)., आदि को शामिल करने की योजना है । भारत का यह महत्त्वाकांक्षी राष्ट्रीय नेटवर्क चार स्तरों पर संचालित है । ये स्तर है: राष्ट्रीय, क्षेत्रीय, मंडलीय व स्थानीय । राष्ट्रीय केन्द्र इन सभी स्तरों के केन्द्रों के बीच समन्वय स्थापित करता है । भारत के चारों दिशाओं उत्तर, दक्षिण, पूर्व एवं पश्चिम में इसने अपने क्षेत्रीय केन्द्रों की स्थापना की है ।।
| उद्देश्य:- इंपिलबनेट के निम्नलिखित उद्देश्य हैं:
(1) भारत में स्थित विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों, शोध संस्थाओं आदि के अंतर्गत कार्यरत पुस्तकालयों, सूचना एवं प्रलेखन केन्द्रों का एक राष्ट्रीय नेटवर्क स्थापित करना;
(2) सूचना संसाधनों के समुचित उपयोग हेतु सभी प्रतिभागी पुस्तकालयों के बीच समन्वय स्थापित करना;
(3) कंप्यूटर प्रयोग के द्वारा पुस्तकालयों का आधुनिकीकरण करना;
(4) उचित प्रलेखों की उपलब्धता सुनिश्चित करना;
(5) मानव शक्ति को प्रशिक्षित करना जिससे पुस्तकालयों के आधुनिकीकरण को सही दिशा प्रदान की जा सके।
(6) विभिन्न प्रकार के सॉफ्टवेयरों एवं मानकों का निर्माण करना,
(7) देश के विभिन्न पुस्तकालयों में मोनोग्राफ, क्रमिक प्रकाशनों व पुस्तकेतर सामग्री की ऑन लाइन संघीय प्रसूची तैयार कर पुस्तकालयों के संसाधनों का विश्वसनीय अभिगम प्रदान करता;
(8) ग्रंथात्मक सूचना स्रोतों का उद्धरण व सारांश के साथ बेहतर अभिगम प्रदान करना;
(9) वैज्ञानिकों, इंजिनियरों, शोधार्थियों, शिक्षाविदों, अध्यापकों, विधार्थियों को ई-मेल
सुविधा, बुलेटिन बोर्ड सेवा, फाइल विनिमय, विडियों मंत्रणाओं आदि के माध्यम से वैज्ञानिक संचार, सुविधाएँ उपलब्ध कराना; तथा
(10) ऑनलाइन सेवा प्रदान करने हेतु परियोजनाओं, संस्थाओं व विशेषज्ञों जा डेटाबेस तैयार करना ।

उपलब्धियां:-

 विगत वर्षों में इंप्लिबनेट की निम्नलिखित उपलब्धियाँ रही हैं:
(क) सन् 1999 तक 1०6 विश्वविद्यालयों के पुस्तकालयों को कंप्यूटरीकृत किया गया ।
(ख) एकीकृत पुस्तकालय प्रबंध सॉफ्टवेयर (ILMS: Integrated Library Management Software) का निर्माण किया गया । इसके बाद SOUL सॉफ्टवेयर का निर्माण किया गया ।
 (ग) क्रमिक प्रकाशनों की अनुक्रमणिकाओं की सेवा (COPSAT: Contents wilth Abstracts of Periodicals in Sc. & Tech.) प्रदान की गई ।।
(घ) अभी तक 28,000 क्रमिक प्रकाशनों, 50,000 शोध प्रबंधों एवं लाखों पुस्तकों का डेटाबेस तैयार किया जा चुका है ।
(ङ) समरूपता के लिए पुस्तकों, धारावाहिकों, शोध प्रबंधों, लघु शोध प्रबंधों ये डेटा संग्रहण हेतु एक मानक निवेश प्रारूप (Standard Input Format) तैयार किया, जिसका सभी प्रतिभागी पुस्तकालय प्रयोग करते हैं ।
(च) इंपिलबनेट प्रतिवर्ष कैलिबर (CALIBER: National Convention on Automation of Libraries in Higher Education and Research Institutions) का आयोजन करता है । इसमें नेटवर्क कार्यक्रम की वर्तमान स्थिति का
मुल्यांकन किया जाता है एवं भविष्य के लिए परियोजनाएँ बनायी जाती हैं । 

Updated: July 9, 2019 — 1:57 pm

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