नेटवर्क से क्या अभिप्राय है? वर्तमान युग में नेटवर्क की महत्ता को विस्तारपूर्वक समझाये ।

नेटवर्क से क्या अभिप्राय है? वर्तमान युग में नेटवर्क की महत्ता को विस्तारपूर्वक  समझाये ।

4. निम्नलिखित में किस नेटवर्क को भारत में नेटवर्किंग का जनक माना जा सकता है:
(अ) अरनेट (ब) विद्यानेट (स) सरनेट
(द) द्रोण
 5. निम्नलिखित में भारत का पहला व्यापारिक नेटवर्क कौन-सा है:
(अ) अरनेट (ब) विद्यानेट (स) विक्रम
(द) इंडोनेट
6. आई एस डी एन (ISDN) से अभिप्राय है:
(क) इंटरनेशनल सर्विसेज डिजिटल नेटवर्क (ख) इंट्रीग्रेटेड सर्विसेज डिजिटल नेटवर्क (ग) इंडियन सिरियल डाइरेक्ट नेटवर्क
(घ) इंडियन साइंटिफिक डिजिटल नेटवर्क
7. सारांश
| अब तक आपको इस इकाई के माध्यम से नेटवर्क की पीरभाषा एवं इनकी आवश्यकता से अवगत कराने का प्रयास किया गया । इस इकाई में आपने भारत में संचालित विभिन्न संचार नेटवर्को के उद्देश्यों एवं उपलमिधयों के बारे में जानकारी प्राप्त की । विस्तृत अध्ययन हेतु ग्रंथसूची आगे दी गई है, जिसमें कुछ इंटरनेट साइटों के पते भी दिये गये हैं ।
8.अभ्यासार्थ प्रश्न
. निम्नलिखित नेटवर्को के उद्देश्यों एवं क्रियाकलापों का वर्णन करें:
(1) अरनेट (2) सरनेट (3) द्रोण (4) विद्यानेट (5) टाइफैकलाइन
9. पारिभाषिक शब्दावली
 (1) क्षेत्रीय नेटवर्क (Regional Network): वे नेटवर्क जो किसी भौगोलिक क्षेत्र के स्तर पर तथा उस क्षेत्र की सीमा में स्थापित किये जाते है ।।
(2) नेटवर्क (Network): दो या दो से अधिक संगठनों, निकायों अथवा यंत्रोंकी एक ऐसी प्रणाली जिसके अंतर्गत प्रत्येक सहभागी अन्य सहभागियों के संसाधनों का समुचित उपयोग है |
(3) राष्ट्रीय नेटवर्क (National Network) : वे नेटवर्क जो सम्पूर्ण देश की सीमा के अंतर्गत स्थापित किये जाते हैं, राष्ट्रीय नेटवर्क कहलाते हैं ।
(4) विस्तृत क्षेत्र नेटवर्क (Wide Area Network) : वे नेटवर्क जो किसी भी प्रकार की भौगोलिक सीमा से परे होते हैं, अर्थात् वैसे नेटवर्क समस्त विश्व में किसी भी संस्थान, निकाय या संगठन दारा अभिगम्य हैं, विस्तृत क्षेत्र नेटवर्क कहलाते हैं ।

संचार नेटवर्क से आप क्या समझते है? भारत में कार्यरत संचार नेटवर्को के उद्देश्यों एवं | उपलब्धियों का विस्तारपूर्वक विवेचन करें 

(5) स्थानीय नेटवर्क (Lcoal Area Network) : वे नेटवर्क जो स्थानीय स्तर पर
स्थापित किये जाते हैं अर्थात् इन्हें किसी भवन अथवा परिसर की सीमा के अन्तर्गत
स्थापित किया जाता है । 10. विस्तृत अध्ययनार्थ ग्रंथसूची 1. लाल, सी एवं के कुमार, प्रलेखन एवं सूचना विज्ञान. 2 भाग, ई.एस.एस. प्रकाशन,
दिल्ली, 2001 2. Kaul, HK, Library Resource Sharing and Networks, Virgo
Publications, New Delhi, 1999 3. Ramalingam, Library and Information Technology: Concepts to
Applications, Kalpaz Publications, Delhi: 2000 4. Sehgal, RL, An Introduction to Library Networks, Ess Ess
Publications, New Delhi; 1996 5. Chakraborty, Shalini, ets. Developing Database, Yojana, 44, 1, 23
32
इंटरनेट साइटें (a) http://vision.doe.ernet.in/rd.htm (b) http://vision.doe.ernet.in/about.htm (c) http://hub.nic.in/intro.htrol (d) http://hub.nic.in/services/index.htme

भारत में पुस्तकालय नेटवर्क: राष्ट्रीय नेटवर्क (Library Networks in India: National Networks) 

उद्देश्य 1. पुस्तकालय नेटवर्क की परिभाषा एवं वर्तमान युग में इसकी उपयोगिता पर प्रकाश
डालना, 2. पुस्तकालय नेटवर्क को स्थापित करने में सहायक कारक एवं इसके लाभ से परिचित
होना, 3. भारत में क्रियाशील पुस्तकालय नेटवर्को के उद्देश्यों, क्रियाकलापों एवं इनकी उयोगिताओं
से अवगत होना, 4. कुछ प्रस्तावित पुस्तकालय नेटवर्कों के विषय में संक्षिप्त जानकारी प्राप्त करना। संरचना
1. विषय प्रवेश । 2. पुस्तकालय नेटवर्क क्या है? 3. पुस्तकालय नेटवर्क की आवश्यकता 4. पुस्तकालय नेटवर्क को प्रभावित करने वाले कारक 5. पुस्तकालय नेटवर्क स्थापित करने हेतु आवश्यक चरण 6. पुस्तकालय नेटवर्क के लाभ 7. भारतीय परिप्रेक्ष्य में पुस्तकालय नेटवर्क
7.1. ईलनेट 7.2. कैलिबनेट
मालिबनेट 7.4. बोनेट 7.5. एडीनेट 7.6. पुणेनेट 7.7. माइलिबनेट 7.8. इंपिलबनेट 7.9. इनविस नेटवर्क 7.10 हेल्लिस नेटवर्क 7.11. खगोलिकी पुस्तकालय नेटवर्क
7.12. लकनेट 8. सारांश 9. अभ्यासार्थ प्रश्न
10. पारिभाषिक शब्दावली
11. विस्तृत अध्ययनार्थ ग्रंथसूची 1. विषय प्रवेश
सूचना संबंधी संसाधनों की सहभागिता आज प्रत्येक पुस्तकालय, चाहे वह छोटा हो या बड़ा, सभी के लिए अपरिहार्य हो गया है । पुस्तकालय आज किसी न किसी रूप में संचार नेटवर्को से जुड़े हैं, जिससे सूचनाओं की परस्पर सहभागिता आसान हो सके । इस इकाई में नेटवर्क से संबंधित उन सभी पहओं को दर्शाया गया है जो प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से पुस्तकालयों से जुड़े हुए हैं । एक पुस्तकालयकर्मी के लिए यह आवश्यक है कि वह नेटवर्क की संरचना, इसकी आवश्यकता, विभिन्न प्रकार के नेटवर्को आदि के विषय में मूलभूत जानकारी प्राप्त करे । इसी को ध्यान में रखकर इस इकाई में पुस्तकालय नेटवर्क के बारे में जानकारी उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया है । विस्तृत रूप से अध्ययन हेतु इकाई के अंत में एक अध्ययनार्थ ग्रंथसूची को शामिल किया गया है ।

2. पुस्तकालय नेटवर्क

पुस्तकालय नेटवर्क एक अन्तसंबधित पुस्तकालय प्रणाली है, जिसमें विभिन्न पुस्तकालय एवं सूचना केन्द्र अपने संसाधनों की सहभागिता हेतु परस्पर एक-दूसरे से जुड़े रहते हैं । वास्तव में पुस्तकालय नेटवर्क, पुस्तकालय सहयोग एवं सहभागिता का एक अवयव है जो सूचना, सामग्रियों एवं सेवाओं के विनिमय के उद्देश्य से कंप्यूटरों के द्वारा जुड़े रहते है । दूसरे शब्दों में, पुस्तकालय नेटवर्क एक विशिष्ट प्रकार की पुस्तकालय सहभागिता है, जिसे सहकारिता कार्यक्रमों एवं सेवाओं के केन्द्रीयकृत विकास हेतु निर्मित किया जाता है, जिसमें कंप्यूटर एवं दूरसंचार प्रणाली का प्रयोग, एक केन्द्रीय कार्यालय की स्थापना एवं नेटवर्क कार्यक्रम को सुचारु रूप से चलाने हेतु प्रशिक्षित अधिकारियों की आवश्यकता होती है । विलियम कदज ने इसे इस प्रकार परिभाषित किया है
‘जब दो या दो से अधिक पुस्तकालय अपने संसाधनों की साझेदारी स्थापित करने का निर्णय करते हैं, पारस्परिक अधिग्रहण के कार्यक्रम को विकसित करते हैं और अपने अनुभवों एवं अन्य सामग्रियों को एक साथ केंद्रित करते हैं, जिससे एक प्रकार की सहकारिता की स्थापना होती है, तो इसे पुस्तकालय नेटवर्क कहते हैं ।

3. पुस्तकालय नेटवर्क की आवश्यकता

सूचना की तीव्र वृद्धि दर को देखते हुए निम्नलिखित कारणों से पुस्तकालय नेटवर्क की आवश्यकता महसूस होती है: – (1) वर्तमान समय में कोई भी पुस्तकालय या सूचना केन्द्र अपने पाठकों को सभी उपलब्ध वांछित सूचनाएँ देने में असमर्थ है । अतः प्रतिभागी पुस्तकालयों के संसाधनों की परस्पर साझेदारी दारा पाठकों के आवश्यकता की पूर्ति एक सीमा तक की जा सकती
(2) पुस्तकालय नेटवर्क के जरिये सूचनाओं का सम्प्रेषण इतना तीव्र हो जाता है कि दूरस्थ पाठकों को भी कुछ ही क्षणों के भीतर वांछित सूचना प्राप्त हो जाती है, जो पुस्तकालय विज्ञान के चतुर्थ नियम को संतुष्ट करता है ।। 

Updated: July 9, 2019 — 1:58 pm

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