डेलनेट और डेलसर्च (DELSEARCH) मे क्या फर्क है, दोनों के गुण और दोषों का वर्णन कीजिये ?

डेलनेट और डेलसर्च (DELSEARCH)  मे क्या फर्क है, दोनों के गुण और दोषों का वर्णन कीजिये ?

6) समसामयिक शोध पत्रिकाओं की सूची तैयार करनों;
(7) सामयिक भिन्नता एवं चयनात्मक सूचना संप्रेषण को बढ़ावा देना ।
(8) जिस्ट (GIST) तकनीक का प्रयोग कर विभिन्न भाषाओं के प्रकाशनों के एक डेटाबेस तैयार करना; तथा
(9) ग्रंथात्मक डेटाबेस का निर्माण व देख-रेख करना ।
उपलब्धियाँ:
(1) डेलनेट ने सभी सदस्य पुस्तकालयों को मुक्त ई-मेल सुविधा उपलब्ध काया है । वर्तमान में अरनेट के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ई-मेल के द्वारा अभिगम की सुविधा उपलमु कराता है;
(2) डेलनेट ने हेलसिस (DELSIS) नामक एक सॉफ्टवेयर का निर्माण किया है; यह | सॉफ्टवेयर बेसिस प्लस में लिखा गया है;
(3) डेलनेट ने डेविनसा (DEVINSA) नामक एक डेटाबेस का निर्माण किया है;
(4) डेलनेट ने पुस्तकों की ऑनलाइन प्रसूची प्रारम्भ की है;
(5) पुस्तकों की संघीय प्रसूची को विकसित करने हेतु लिब्रीस (LIBRIS) न उपयोग किया जा रहा है; तथा
(6) इसके अतिरिक्त डेलनेट अपने सदस्य पुस्तकालयों को निम्नलिखित सुविधाएँ भी उपलब्ध कराता है;
(क) इंटरनेट अभिगम की सुविधा;
(ख) सी.सी.एफ. (CCF) एवं मार्क (MARC) प्रारूप में पुस्तकों की दंघीय प्रसूची को उपलब्ध कराना;
(ग) विशिष्ट भारतीयों की सूची तैयार करना;
(घ) सीडी-रोम (CD-ROM) डेटाबेस की सुविधा; तथा
(ङ) डेलसर्च (DELSEARCH) द्वारा ई-मेल की सुविधा ।।
प्रतिभागी पुस्तकालयों के लिए निर्धारित मानदण्ड:- डेलनेट ने सभी प्रतिभागी पुस्तकालयों के लिए कुछ मानदण्ड निर्धारित किये हैं, जो निम्नलिखित हैं:
(1) प्रत्येक सहभागी पुस्तकालय को विषय-शीर्षक एवं मुख्यशब्द देने अनिवार्य हैं;
 (2) डेलनेट ने यूनेस्को (UNESCO) द्वारा विकसित सी. सी. एफ (CCF) को मानक प्रारूप का दर्जा दिया है । अतः प्रत्येक प्रतिभागी पुस्तकालय को विषय-शीर्षक हेतु एक टैग (Tag) क्रम मदान करने होते हैं ।
(3) डेलनेट के भागीदार पुस्तकालय किसी भी वर्गीकरण पद्धति का प्रयोग कर सकते है ।

डेलनेट सांख्यिकी:- 

डेलनेट ने विभिन्न प्रकार के डेटाबेसों का निर्माण किया है । इन डेटाबेसों में रिकार्डों की कुल संख्या को निम्नलिखित सारणी के माध्यम से दर्शाया गया है । पुस्तकों की संघ प्रसूची (सी सी एफ)
8,77,772 पुस्तकों की संघ प्रसूची (मार्क)
27,231 समसामयिक प्रकाशनों की संघ प्रसूची
16,497 पत्रिकाओं की संघ प्रसूची
10,623 सीडी-रोम (CD-ROM) डेटाबेस
1,214 विडियो रिकार्डिंग की संघ प्रसूची
2,278 ध्वनि रिकॉर्डिंग की संघ प्रसूची
708 उर्द पाण्डुलिपियों का डेटाबेस
210 लघु शोध प्रबंधों एवं शोध प्रबंधों का डेटाबेस
16,587 विशिष्ट भारतीयों का डेटाबेसः (हु ज हु)

डेविनसा (DEVINSA) डेटाबेस

20,000 7.2. कैलियनेट (CALIBNET: Calcutta Library Network)
कैलिबनेट, कलकत्ता लाइब्रेरी नेटवर्क का संक्षिप्त नाम है । इस पुस्तकालय नेटवर्क को भारत का पहला क्षेत्रीय पुस्तकालय नेटवर्क होने का गौरव प्राप्त है, परन्तु एक पंजीकृत संस्था के रूप में डेलनेट को प्रथम पुस्तकालय नेटवर्क होने का दर्जा प्राप्त है । इस नेटवर्क की स्थापना 1988 में हुई परन्तु एक पंजीकृत संस्था के रूप में इसे 1994 में मान्यता मिली । निसात हारा वित्तीय सहायता प्राप्त इस पुस्तकालय नेटवर्क ने 1991 में मैत्रेयी (MAITRAYEE) नामक सॉफ्टवेयर बनाया । इस समय 38 सदस्य पुस्तकालय इस नेटवर्क में शामिल हैं, जिसमें केवल 13 सदस्य पुस्तकालय ही इसके विकास में मुख्य भूमिका निभा रहे।
कैलिबनेट के अंतर्गत सर्वप्रथम प्रतिभागी पुस्तकालय को कंप्यूटरीकृत किया जाता है । इसके पश्चात् उस पुस्तकालय को नेटवर्क से जोड़ा जाता है । सभी प्रतिभागी पुस्तकालय परस्पर X.25 प्रोटोकॉल से जुड़े हुये हैं । इस समय इन्सडॉक (INSDOC) के कोलकाता स्थित क्षेत्रीय केन्द्र में इसका प्रमुख कार्यालय स्थापित है और यह केन्द्र ही इसकी गतिविधियों को नियंत्रित करता है |
| इस पुस्तकालय नेटवर्क में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के 38 पुस्तकालयों को दो चरणों में एक साथ संबद्ध करने की योजना है। प्रथम चरण में जादवपुर विश्वविद्यालय समूह के सभी संस्थान राजाबाजार समूह के कुछ केन्द्रों को शामिल किया गया । प्रथम चरण में जिन संस्थानों/संगठनों के पुस्तकालयों को शामिल किया गया है, वे निम्नलिखित हैं:
(क) बोस संस्थान, कोलकाता (ख) जादवपुर विश्वविद्यालय, जादवपुर (ग) कलकत्ता विश्वविद्यालय, कोलकाता (घ) रेडिया भौतिकी विभाग, कलकत्ता विश्वविद्यालय (ङ) केन्द्रीय काँच एवं सिरेमिक अनुसंधान संस्थान (च) कृषि विइगन का भारतीय संघ (छ) इन्सडॉक (INSDOC) क्षेत्रीय केन्द्र, कोलकाता (ज) भारतीय रासायनिक जीव विज्ञान संस्थान

उद्देश्य:- कैलिबनेट के निम्नलिखित उद्देश्य हैं:

(1) सभी प्रतिभागी पुस्तकालयों के संसाधनों की सहभागिता को बढ़ावा देना, (2) प्रलेख अधिग्रहण एवं धन लेखांकन में यंत्रीकरण का प्रयोग करना, (3) धारावाहिक नियंत्रण, (4) कंप्यूटरीकृत प्रसूचीकरण का विकास, (5) प्रतिभागी पुस्तकालयों द्वारा प्राप्त डेटा फाइलों को एक मानक प्रारूप आई एस ओ
(ISO)-2709 में बदलना जिससे कि सभी फाइलों को कैलिबनेट के केन्द्रीयकृत डेटाबेस में डाला जा सके ।
प्रदत्त सेवाएँ:- कैलिबनेट निम्नलिखित सेवाएँ प्रदान करता है:
(1) कॉनफाइल (Confile) सेवा: इस सेवा द्वारा पत्रिकाओं की अनुक्रमणिकओं को उपलब्ध कराया जाता है ।
(2) कैलिब आईर (Calib Order): इस सेवा द्वारा पेटेंट की मूल प्रति उपलब्ध करायी
जाती है । (3) कॉन अलर्ट (Con Alert): यह कैलिबनेट की सामयिक ग्रंथात्मक सेवा है ।
(4) रेट्रो फाइल (Retro File): विशिष्ट क्षेत्रों में अनुसंधान की स्थिति से अवगत कराने वाली सेवा।
(5) कैलिब लिंक (Calib Link): चार सदस्य संस्थानों के बीच ई-मेल सेमा उपलब्ध कराना।
उपलब्धियाँ:- इस नेटवर्क की कुछ उपलब्धियाँ निम्नलिखित हैं:
(क) कैलिबनेट ने अपना एक केन्द्रीयकृत डेटाबेस तैयार किया है, जो कैलिबनेट केन्द्रीयकृत
डेटाबेस (CCD: Calibnet Centralized Detabese) के नाम से जाना जाता है । इस डेटाबेस में। सभी भागीदार पुस्तकालयों के विशिष्ट डेटाबेसों को समाहित किया गया
है । (ख) इस डेटाबेस हेतु कैलिबनेट ने संयुक्ता (Sanjukta) नामक एक सॉपटवेया बनाया है ।
सूचना संग्रहण एवं पुनःप्राप्ति हेतु यह सॉफ्टवेयर अत्यंत उपयोगी है । (ग) कैलिबनेट ने सूचनाओं के हस्तांतरण हेतु पारपार (PARPAR) नामक एक सॉफ्टवेयर
बनाया है । इस सॉफ्टवेयर की मदद से आस मार्क (USMARC) यूनीमार्क (UNIMARC) तथा सी.सी.एफ. (CCF) प्रारूप वाले ऑकड़ो का विनिमय किया जा सकता है ।

7.3. मालिबनेट (MALIBNET: Madras Library Network)

मालिबनेट, मद्रास लाइब्रेरी नेटवर्क का संक्षिप्त नाम है । इस पुस्तकालय नेटवर्क का प्रारम्भ 1991 में इन्सडॉक (INSDOC) के चेन्नई स्थित कार्यालय में हुआ, परन्तु एक पंजीकृत संस्था के रूप में इसने 1993 में कार्य करना प्रारम्भ किया । वर्तमान में इस नेटवर्क में 50 सदस्य पुस्तकालय शामिल हैं ।
उद्देश्य:- इस नेटवर्क के निम्नलिखित उद्देश्य हैं:(1) पुस्तकालय विज्ञान, प्रलेखन, सूचना विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी आदि के क्षेत्रों में होने वाले नये-नये वैज्ञानिक अनुसंधानों को बढ़ावा देना; (2) चेन्नई एवं आसपास के पुस्तकालयों व सूचना विज्ञान केन्द्रों का एक विस्तृत नेटवर्क तैयार करना; (3) अन्य क्षेत्रीय, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पुस्तकालयों के साथ समन्वय स्थापित करना; तथा (4) समय-समय पर कांफ्रेंस, सेमिनार व कार्यशालाओं का आयोजन करना ।

Updated: July 9, 2019 — 1:57 pm

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