एक पुस्तकालय में नेटवर्क की क्या आवश्यकता पड़ती है? और पुस्तकालय नेटवर्क को प्रभावित करने वाले कारकों का वर्णन कीजिये ?

एक पुस्तकालय में नेटवर्क की क्या आवश्यकता पड़ती है? और पुस्तकालय नेटवर्क को प्रभावित करने वाले कारकों का वर्णन कीजिये ?

(3) इसके द्वारा डेटा प्रोसेसिंग का विकेन्द्रीकरण किया जा सकता है ।
(4) पुस्तकालयों के वार्षिक बजट में होने वाली कमी के विकल्प के रूप में पुस्तकालय नेटवर्क कार्य कर सकता है ।
(5) पुस्तकालय नेटवर्क, उपयोगकर्ताओं को एक भौगोलिक सीमा से मुक्त करता है ।
(6) नेटवर्क के द्वारा सॉफ्टवेयर का अधिक-से-अधिक उपयोग संभव है ।
4. पुस्तकालय नेटवर्क को प्रभावित करने वाले कारक
पुस्तकालय नेटवर्क बहुत से बाल्य एवं आतंरिक कारकों से प्रभावित होते हैं, जिनमें से कुछ मुख्य कारक निम्नलिखित हैं:
(क) प्रतिभागी पुस्तकालयों एवं संस्थाओं की इच्छाशक्ति; (ख) मानकों एवं प्रतिरूपों की समरूपता पर सहमति; (ग) प्रशिक्षित मानवशक्ति; (घ) संचार तकनीकों की उपलब्धता; (ङ) सॉफ्टवेयर एवं हाईवेयर में सामंजस्य; (च) वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता; एवं (छ) उत्तम प्रबंध समिति । ।

5. पुस्तकालय नेटवर्क स्थापित करने हेतु कुछ आवश्यक चरण

एक प्रभावशाली पुस्तकालय नेटवर्क स्थापित करने हेतु कुछ आवश्यक चरण इस प्रकार
(क) सभी प्रतिभागी पुस्तकालयों एवं सूचना केन्द्रों के लिए कंप्यूटरों की उपलब्धता
सुनिश्चित करना; (ख) प्रतिभागी पुस्तकालयों/सूचना केन्द्रों के बीच ई-मेल के सुविधा की व्यवत्था करना; (ग) क्रमिक एवं सावधिक प्रकाशनों के अधिग्रहण हेतु समान मानदण्ड स्थापित करना; (घ) डेटाबेस का एक समान प्रारूप तैयार करना; (ङ) निश्चित समयांतरालों पर डेटाबेस को अपडेट करना; तथा
(च) पुस्तकालयों में कंप्यूटरों के अधिकाधिक प्रयोग को बढ़ावा देना ।

 6. पुस्तकालय नेटवर्क के लाभ ।

पुस्तकालय नेटवर्क का मुख्य उद्देश्य वांछित सूचनाओं को न्यूनतम समय में, रूप से पाठकों को उपलब्ध कराना है, जो मुख्य रूप से भागीदार पुस्तकालयों के संसाधनों की उपलब्धता पर करता है । वर्तमान परिपेक्ष्य में पुस्तकालय नेटवर्क के निम्नलिखित लाभ हैं:
(1) इसके द्वारा पुस्तकालय सेवाओं जैसे चयनित सूचना प्रसारण सेवा (SDI: Selective Dissemination of Information), सामयिक जागरूकता सेवा (CAS: Current Awareness Service) आदि की प्रभावशीलता में वृद्धि की जा सकती है ।
(2) प्रकाशनों की एक से अधिक प्रतियों के अनचाहे के अधिग्रहण पर नेटवर्क द्वारा | नियंत्रण किया जा सकता है 
(3) पाठकों की सेवाओं में विस्तार एवं सुधार किया जा सकता है ।
(4) अंतरपुस्तकालय ऋण प्रणाली के अंतर्गत प्रलेखों की हस्तांतरण सेवा का विस्तार किया | जा सकता है ।
(5) पुस्तकालय के सीमित बजट में इसकी सामग्रियों का अधिकाधिक किया जा सकता है ।
(6) सूचना के बेहतर प्रबंधन हेतु अधिकारियों के प्रबंध को बेहतर बनाया जा सकता है ।
(7) पुस्तकालय नेटवर्क के प्रयोग से पुस्तकों, पत्रिकाओं, धारावाहिकों एवं पुमुकेतर सामग्री | (Nonbook-materials) के विशिष्ट ग्रंथात्मक डेटाबेस के निर्माण एवं अभिगम में काफी सहायता मिलती है ।।

7. भारतीय परिप्रेक्ष्य में पुस्तकालय नेटवर्क

भारत में नेटवकिंग कार्यक्रम का प्रारम्भ दो दशकों से कुछ अधिक पुराना है, जब इंडियन एयरलाइन्स ने आरक्षण हेतु कंप्यूटर नेटवर्क का प्रयोग आरम्भ किया । परन्तु पुस्तकालय नेटवर्क विकसित करने की दिशा में सबसे पहला कदम 1985 में निसात (NISSAT: National Information System for Science And Techology) Cart उठाया गया । इस कार्यक्रम के तहत कैलिबनेट (1996) डेलनेट (1988) पुणेनेट (1992), एडीनेट (1993), बोनेट (1994) माइलिबनेट (1995) आदि पुस्तकालय नेटवर्को की स्थापना निसात द्वारा की गई । सन् 1988 में विश्वविग्रालय अनुदान आयोग ने इंपिलबनेट (INFLIBNET) नामक एक राष्ट्रीय सहकारी पुस्तकालय नेटवर्क की स्थापना की । इन शैक्षणिक एवं पुस्तकालय नेटवर्कों के अलावा भी कुछ अन्य नेटवर्को की स्थापना समय-समय पर की जाती रही है, जिसमें स्पाइस नेटवर्क, खगोलिकी पुस्तकालय नेटवर्क, लकनेट, डेसीनेट आदि प्रमुख हैं। भारत में स्थापित अधिकांश पुस्तकालय का मुख्य उद्देश्य लगभग एक ही समान है । सभी पुस्तकालय नेटवर्क मुख्य रूप से संसाधनों की परस्पर भागीदारी के उद्देश्य से ही स्थापित किये गये हैं ।

7.1. डेलनेट (DELNET: Developing Library Network)

डेलनेट, डेवलपिंग लाइब्रेरी नेटवर्क (पूर्व नाम: दिल्ली लाइब्रेरीज नेटवर्क) का संक्षिप्त नाम है, जिसे भारत का प्रथम पूर्ण संचालित एवं पंजीकृत पुस्तकालय नेटवर्क होने का गौरव प्राप्त है । प्रारम्भ में निसात (NISSAT: National Information System for Science And Technologly) द्वारा प्रायोजित यह पुस्तकालय नेटवर्क, लाइब्रेरी नेटवर्क (Delhi Library Network) के नाम से जाना जाता था । सितम्बर 2000 से इस नेटवर्क का नाम बदल कर डेवलपिंग लाइब्रेरी नेटवर्क रखा गया । डेलनेट का प्रारम्भ 1988 में हुआ परन्तु एक
पंजीकृत संस्था के रूप में इसने 1992 से कार्य आरम्भ किया । वर्तमान में यह पुस्तकालय नेटवर्क राष्ट्रीय सूचना केन्द्र (NIC: National Informatics Centre), योजना आयोग एवं इंडिया इंटरनेशनल सेंटर के सानिध्य में देश का अग्रणी पुस्तकालय नेटवर्क बन गया है ।
कुछ 35 पुस्तकालयों के बीच संसाधनों की समुचित भागीदारी हेतु प्रारम्भ किये गये इस नेटवर्क में वर्तमान में 243 सदस्य पुस्तकालय है, जिनमें 235 भारत में एवं 8 विदेशों में है । निम्नाकिंत सारणी ईलनेट के सदस्य पुस्तकालयों के भौगोलिक वितरण को दर्शाती है: कुल सदस्य
भारत में दिल्ली उत्तर प्रदेश केरल महाराष्ट्र कर्नाटक तमिलनाडु मध्य प्रदेश आंध्र प्रदेश पश्चिम बंगाल असम बिहार हरियाणा हिमाचल प्रदेश जम्मू एवं कश्मीर पांडीचेरी पंजाब राजस्थान गुजरात उत्तरांचल अंडमान व निकोबार असम गोवा मेघालय उड़ीसा भारत से बाहर श्रीलंका संयुक्त राज्य अमेरिका नेपाल ओमान फिलीपींस

उद्देश्य: – डेलनेट के मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं: – 

(1) पुस्तकालय नेटवर्क का विकास कर पुस्तकालय के बीच संसाधनों की सहभागिता को बढ़ावा देनार;
(2) सूचना विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में वैज्ञानिक शोधों को बढ़ावा देना एवं इस क्षेत्र में नये सूचना तंत्रों का विकास करना;
(3) पुस्तकालय संसाधनों एवं प्रलेखों का उचित संग्रहण करना;
(4) नये-नये संदर्भ केन्द्रों की स्थापना करना;,
(5) विशिष्ट डेटाबेसों का विकास करना;
(6) यांत्रिक एवं विद्युतीय उपकरणों के माध्यम से सूचना संप्रेषण की गति को बढ़ाना;
(7) क्षेत्रीय, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अन्य पुस्तकालयों एवं सूचना नेटवर्को के साथ समन्वय स्थापित करना;
(8) रिफ्रल केन्द्र की स्थापना करना और प्रसूची केन्द्र के माध्यम से खोज को सुगम बनाने के लिए सभी सहभागी पुस्तकालयों की सभी प्रकार की सामग्रियों का केन्द्रीय ऑन लाइन संघ प्रसूची तैयार करना;
(9) सदस्य पुस्तकालयों के मध्य तकनीकी सूचनाओं के आदान-प्रदान को! सुलभ बनाना ।
प्रदत्त सेवाएँ:- डेलनेट अपने उपयोक्ताओं के समय व श्रम को कम से कम करने हेतु निम्नलिखित सेवाएँ उपलब्ध कराता है:
(1) विभिन्न संघीय प्रसुचियों का निर्माण एवं विकासः
(2) पत्रिकाओं की संघ सूची का निर्माण;
(3) पुस्तकों की संघ सूची का निर्माण;
(4) सीडी-रोम (CD-ROM) डेटाबेसों का निर्माण;
(5) लघु शोध प्रपत्रों एवं शोध प्रपत्रों के डेटाबेसों का निर्माण; 

Updated: July 9, 2019 — 1:58 pm

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