इनविस नेटवर्क, हेल्लिस और खगोलिकी पुस्तकालय नेटवर्क मे क्या फर्क है ?

इनविस नेटवर्क, हेल्लिस और खगोलिकी पुस्तकालय नेटवर्क मे क्या फर्क है ?

छ) उपयोगकर्ताओं को स्थानीय स्तर पर सेवा उपलब्ध कराने हेतु 400 भूमिका टर्मिनलों
की एक श्रृंखला तैयार की गई है ।।

इनविस नेटवर्क (ENVIS Network: Enviromental Information System Network)

भारत में इनविस नेटवर्क की स्थापना भारत सरकार के पर्यावरण एवं वन मंत्रालय के द्वारा दिसम्बर 1982 में की गई । यह एक विकेन्द्रीकृत सूचना तंत्र है, जिसमें विभिन्न पर्यावरण संबंधित विषयों हेतु अलग-अलग केन्द्रों की स्थापना की गई है ।।
उद्देश्य:- इस नेटवर्क के निम्नलिखित उद्देश्य है:
(1) पर्यावरण विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सूचना संग्रह एवं प्रसार केन्द्र के रूप में कार्य करना;
(2) सूचना संग्रहण, संश्लेषण, विश्लेषण, पुनःप्राप्ति एवं प्रसार हेतु आधुनिक प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देना;
 (3) पर्यावरणीय सूचना, प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में होने वाले शोध, अन्वेषण एवं विकास कार्यों में सहायता करना; एवं
(4) विकासशील देशों के बीच सूचनाओं के विनिमय को बढ़ावा देना।।
भारत में इनविस के मुख्य केन्द्र समेत कुल 21 केन्द्र हैं, जो विभिन्न संस्थानों, संगठनों के अन्तर्गत कार्यरत हैं । इन केन्द्रों में कुछ प्रमुख केन्द्र निम्नलिखित है:
(1) केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण परिषद् नई दिल्लि
(2) औद्योगिक विष विज्ञान शोध केन्द्र, लखनऊ
(3) भारतीय खनिक विद्यापीठ, धनबाद
(4) टाटा ऊर्जा शोध संस्थान, नई दिल्लि
(5) जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय नई दिल्ली
(6) वर्ल्ड वाइड लाइफ फंड, नई दिल्ली

इनविस के मुख्य केन्द्र के निम्नलिखित कार्य हैं: 

(क) प्रलेखन सेवा,
(ख) सूचना सेवा,
(ग) पर्यावरण सार (Parayavarn Absrtact) का प्रकाशन,
(घ) डेटाबेस का विकास; एवं
(ङ) पर्यावरण संरक्षण एवं बचाव के क्षेत्र में लगे गैर सरकारी संगठनों की निर्देशिका का निर्माण।
इनविस के अन्य उद्देश्यों में शामिल हैं:
(1) अन्य सूचना तंत्रों के साथ सूचना विनिमय हेतु संबंध स्थापित करना;
(2) इनफोटेरा (INFOTERRA) के कार्यों हेतु मुख्य केन्द्र के रूप में कार्य करना;
(3) इनविस के विभिन्न केन्द्रों के बीच समन्वय स्थापित करना ।

हेल्लिस (HELLIS: Network of Health Literature, Libraries and Information Services)

इसे संक्षेप में स्वास्थ्य विज्ञान पुस्तकालय नेटवर्क कहते हैं । वर्ष 2000 को सभी के लिए स्वास्थ्य वर्ष के रूप में मनाने की घोषणा की गई । इस परिप्रेक्ष्य में यह आवश्यक समझा गया कि एक ऐसा राष्ट्रीय सूचना तंत्रानेटवर्क होना चाहिए, जो स्वास्थ्य संबंधी सूचनाओं की आवश्यकता, संग्रहण एवं विश्लेषण करके कम से कम समयावधि में उपयोक्ताओं को उपलब्ध करा सके । इसके पहले से ही भारत में स्वास्थ्य एवं चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में एक पुस्तकालय एवं सूचना नेटवर्क की आवश्यकता बहुत वर्षों से महसूस की जा रही थी । इ उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय चिकित्सा पुस्तकालय ने समय-समय पर अनेक कार्यशालाओं का आयोजन किया । इस सिलसिले में सबसे पहला प्रयास अगस्त 1979 में किया गया जब “विश्व स्वास्थ्य संगठन” के दक्षिण-पूर्व एशिया के क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा भारत, बांगलादेश, म्यनमार, इंडोनेशिया, मंगोलिया, नेपाल, श्रीलंका एवं थाईलैण्ड के प्रमुख चिकित्सा पुस्तकालयों के प्रमुखों, प्रशासकों एवं प्रमुख उपयोक्ताओं की एक संगोष्ठी का आयोजन नई दिल्ली में किया गया । इसके परिणामस्वरूप दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र के चिकित्सा साहित्य, पुस्तकालयों एवं सूचना सेवाओं के गठन का प्रस्ताव भी किया गया । फरवरी, 1982 से इस नेटवर्क ने कार्यारंभ किया । भारत में राष्ट्रीय चिकित्सा पुस्तकालय (नेशनल लाइब्रेरी) को इस नेटवर्क का केन्द्र बिन्दु बनाया गया । सन् 1986 में लखनऊ में हुये सेमिनार में हेल्लिस नेटवर्क के आधारिक संरचना कि रूपरेखा तैयार की गई । इन सभी कार्यशालाओं व सेमीनारों की संस्तुति के आधार पर हेल्लिस नेटवर्क में चार स्तरीय पुस्तकालयों को शामिल किया गया ।

हेल्लिस नेटवर्क के कार्य

(क) राष्ट्रीय चिकित्सा पुस्तकालय:- इस पुस्तकालय को भारत में हेल्लिस नेटवर्क के केन्द्र बिन्दु के रूप में रखा गया है ।
(ख) क्षेत्रीय चिकित्सा पुस्तकालय:- सम्पूर्ण देश को 6 चिकित्सा क्षेत्रों में विभाजित कर उन क्षेत्रों के प्रमुख चिकित्सा पुस्तकालयों को इस स्तर पर रखा गया है । ये क्षेत्र है
(1) उत्तरी क्षेत्र – एस. एम. एस. चिकित्सा महाविद्यालय पुस्तकालय, जयपुर
(2) दक्षिणी क्षेत्र – एम. जी. आर. चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय, चेन्नई
(3) पूर्वी क्षेत्र – अखिल भारतीय आरोग्य एवं जन स्वास्थ्य संस्थान, कोक्काता
(4) पस्विमि क्षेत्र – ग्रांट चिकित्सा महाविद्यालय, मुम्बई
(5) मध्य क्षेत्र – चिकित्सा विज्ञान संस्थान, वाराणसी
(6) उत्तर-पूर्व क्षेत्र – क्षेत्रीय चिकित्सा महाविद्यालय, इम्फाल
(ग) संसाधन पुस्तकालय:- पूरे देश में कुल 9 संसाधन पुस्तकालयों को इस नेटवर्क हेतु चुना गया है । ये संसाधन पुस्तकालय कसौली, नागपुर, राँची, कटक, भोपाल, अहमदाबाद, गुवाहाटी, लखनऊ एवं वर्धा में स्थित हैं ।
(घ) स्थानीय पुस्तकालय:- इस पुस्तकालय एवं सूचना नेटवर्क में उपर्युक्त पुस्तकालयों के अलावा कुछ स्थानीय चिकित्सा विज्ञान के पुस्तकालय को भी सम्मिलित किया गया है ।
राष्ट्रीय चिकित्सा पुस्तकालय ने ग्रन्थसूचियों के नियंत्रण हेतु सभी प्रतिभागी पुस्तकालयों के लिए कुछ मानक तैयार किये हैं । साथ ही यह समय-समय पर प्रशिक्षण कार्यशालाओं का भी आयोजन अता है ।

7.11. खगोलिकी पुस्तकालय नेटवर्क (Networking of Astronomy Libraries)

भारत प्रारम्भ से ही खगोल विज्ञान के क्षेत्र में अग्रणीय रहा है । अतः सूचना प्रौद्योगिकी के इस युग में अन्य विषयों से संबंधित नेटवर्को की भांति खगोल विज्ञान के पुस्तकालयों के एक नेटवर्क की आवश्यकता महसूस की जा रही है । वर्तमान समय तक इस प्रकार का कोई पुस्तकालय नेटवर्क कार्यरूप में नहीं आया हैं, परन्तु इसका प्रारूप तैयार कर लिया गया है ।।
इस प्रस्तावित पुस्तकालय नेटवर्क में भारत के आठ वैज्ञानिक संस्थानों के पुस्तकालयों को शामिल करने की योजना है । ये वैज्ञानिक संस्थान निम्नलिखित है:
1. इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स पुस्तकालय
2. इंटर यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर एस्ट्रोनॉमी एण्ड एस्ट्रोफिजिक्स पुस्तकालय, पुणे
3. नेशनल सेंटर फॉर रेडियो ऐस्ट्रोफिजिक्स पुस्तकालय, पुणे
4. फिजिकल रिसर्च लेबोरेट्रीज पुस्तकालय, अहमदाबाद
5. रमण रिसर्च इंस्टीट्यूट पुस्तकालय, बंगलोर
6. टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फण्डामेंटल रिसर्च पुस्तकालय, मुम्बई
7. उत्तर प्रदेश स्टेट ऑबजरवेटरी पुस्तकालय, नैनीताल
8. निजाम ऑबजरवेटरी पुस्तकालय, हैदराबाद
इस प्रस्तावित पुस्तकालय नेटवर्क में प्रतिभागी पुस्तकालयों की पुस्तकों, पत्रिकाओं, पूर्वप्रकाशनों, प्रसूचियों, योजना निर्णयों, सामयिक घटनाओं से संबंधित प्रकाशनों आदि को शामिल करने की योजना है । वर्तमान में जिन छ पुस्तकालयों को इस नेटवर्क में शामिल करने की योजना है, उनकी पुस्तकों एवं पत्रिकाओं की कुल संख्या क्रमश 1,33,426 एवं 1,42,029 है । वर्तमान में प्रतिभागी पुस्तकालय अलग-अलग पुस्तकालय सॉफ्टवेयर का प्रयोग कर रहे हैं । चार पुस्तकालय लिबसिस (LIBSYS) सॉफ्टवेयर का प्रयोग कर रहे है और बाकी चार में से दो स्लिम (SILM) सॉफ्टवेयर का | दो प्रतिभागी पुस्तकालय अभी कंप्यूटर अनुप्रयोग की विकासशील अवस्था में हैं । 

Updated: July 9, 2019 — 1:51 pm

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